रविवार, 11 सितंबर 2011

मेरे फ्लैट की खिड़की से सागर दिखता है


मेरे फ्लैट की खिड़की से सागर दिखता है॥
धरती से मिलता ये अम्बर दिखता है॥
टीम टीम करते आते हैं चंदा -तारे
झिलमिल झीलमिल सारा शहर दिखता है।
सच बादल में बनता है क्या रूप तुम्हारा
या ये मौसम का असर दिखता है।
रिम झिम बादल जैसा मेरा मन
सपनो का नम सारा मंजर दिखता है।
भरा पड़ा है घर मेरा दुनिया के सामान से
तुम बिन लेकिन सबकुछ मुझको कम दिखता है.
लाखो सुरज हो जाएँ शर्मिंदा जैसे
जब मुझको मेरा अंतर दिखता है .

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

Rule 49 – O, Power to say No

How many of us know about Rule 49 – O?


This rule gives us right to say NO.

Many time most of us felt that candidates does not deserve our vote but we have no choice other than sitting home or vote for one you don’t like to be your leader.

It is very unfortunate that general public is unaware of the existence of such a powerful rule. As per the 1969 act, in section “49-O” There is a system in our constitution that a person can go to the polling booth, confirm his identity, get his finger marked and convey the presiding election officer that he doesn't want to vote anyone!

This is most unexposed right is available us, but these leaders have never disclosed it for obvious reasons and it is very surprising why the election commission has not taken any step to publicy such a powerful and important rule to voters.

Next time use your right. This would bring fear into parties and hence they will look for genuine candidates for their parties for election.

Please spread this news to as many as you know. 49-O is wonderful weapon against corrupt parties in India.

Use your voting right for a better INDIA. Jai ho.

Important

Recently The Election Commission has been directed by the Madras High Court to give effect to Rule 49-O of the Conduct of Elections Rules by giving wide publicity in the electronic and print media.

Chief Justice M Y Eqbal and Justice T S Sivagnanam, while passing orders on a petition filed by S Sathia Chandran, an advocate, directed that the Commission should also make the general public aware of the existence of the said rule by publishing it in two leading English and Tamil newspapers having a wide circulation.

Advocate S Thamizharasan from Madurai who opposed an announcement by the commission that form 49-O should be obtained only after giving one's full address and particulars in the voter's list.

Pointing out that this was against the principles of democracy; Thamizharasan said that the voting procedure is a secret ballot system. "If anybody gives his full address to cast his vote under 49-O, then he will be identified, secluded and condemne.

Asserting that a person who wants to exercise the 49-O option should be treated on a par with a voter casting his vote for any contestant, the petitioner also sought for the Election Commission to provide a 49-O' column on every voting machine.



सोमवार, 18 अप्रैल 2011

अन्ना का अनशन ब्लाक्क्मैलिंग है तो गाँधी सबसे बड़े ब्लैक मेलर थे

अंग्रेजों के खिलाफ जब आन्दोलन चला तो गाँधी और उनके सहयोगी जनसाधारण द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि नहीं थे...जनता ने उन्हें अपना लीडर बिना किसी वोट और प्रक्रिया के चुना था. क्यूंकि उनकी आवाज़ आम जनता कि आवाज़ थी. अन्ना की आवाज़ भी जनता की आवाज़ है और लोकतंत्र में इस से बड़ा सविंधान कोई नहीं होता. उस संविधान और नियम क़ानून का क्या फ़ायदा जो जनता की आवाज़ नहीं सुनता.
सत्याग्रह एक कारगर हथियार है , जिसका लोहा सारी दुनिया मानती है ..इसका दुरूपयोग हो सकता है, किन्तु अन्ना ने इसका उपयोग किया है... गलत आदमी का साथ जनता नहीं देती.. अन्ना को गलत कहना.. उन्हें ब्लैक मेलर कहना ..लोकतंत्र का अपमान है..उसकी जनता का अपमान है..इस देश के चौथे स्तम्भ मीडिया का अपमान है.. जिन सबने मिलकर अन्ना का साथ दिया. जिन लोगो ने इन् तमाम नेताओं को चुना है, वो भी अन्ना की मुहीम में शामिल है. हिम्मत है तो अपने छेत्र में जाकर लोगों से बात करे..जूत्ते नहीं पड़े तो नाम बदल देना.
१५ अगस्त १९४७ को हमे आजादी मिली थी. आज देश में भ्रस्टाचार, बेईमानी , लूट-पाट , वो भी नेतायों द्वारा देख कर ऐसा लगता है , जैसे उस दिन हमे आज़ादी नहीं मिली थी. गोरो ने कालो के हाथ में सत्ता का हस्तांतरण कर दिया था. हमारे नेतायों को अधिकार दे दिया था, कि २०० साल हमने लूटा , अब तुम सब अनन्त काल तक लूटो. तब गैर लूट रहे थे , आज कहने को अपने लूट रहे हैं. जनता , लोकतंत्र की जनता, संविधान, क़ानून कि दुहाई दे दे कब तक चुप करायी जाती रही ..? लेकिन आखिर कब तक ? एक न एक दिन तो ये होना था. अच्छा हुआ जल्दी हो गया , वो भी अन्ना जैसे गाँधी वादी के हाथ , कहीं यही भगत सिंह , आज़ाद जैसे गरम मिजाज़ वाले जवान के हाथ होता तो इसका अंजाम आप सब सोच सकते हैं. तब ऐसे जवानो को देशद्रोही , गुंडा कहते ये काले नेता... जैसे अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को कहा.

जनता ने अपना मत अन्ना के प्रति ज़ाहिर कर दिया है, क्यूंकि उनका नेतायों पर से विश्वास उठ गया है. कुछ ईमानदार नेतायों के लिए ये चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन पब्लिक सब जानती है. उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. उन्हें ये सोचना होगा की ऐसी पहल वो खुद करें.. तो जनता उन्हें सर आँखों पर बैठा लेगी. अन्ना के खिलाफ बोलना उनके लिए महंगा साबित हो सकता है.



A drop of ink, makes million think
www.anandrathore.com

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

हल्ला बोल

Anna Hazare

ये पोस्ट मुझे बहुत से लोगो ने मेल की , पढ़ा तो अच्छा लगा..सोचा शयेर कर लूं. सुना है राम गोपाल वर्मा को पता नहीं अन्ना हजारे कौन हैं। हो सकता है बहुत और भी ऐसे हो । शायद ये देख कर उन्हें पता चल जाएगा। ख़ास कर ये पोस्ट मेरे छोटे दोस्त Chaitanya शर्मा के लिए है... जिसे आज से ही पता रहेगा, की अन्ना हजारे कौन हैं। हमे अपने बच्चों को बहादुर लोगों के बारे में ज़रूर बताना चाहिए..

जनता की मांग न मानना तानाशाही है. लोकतंत्र नहीं

आदरणिय प्रधानमंत्री जी

आप से सीधा सा सवाल है. लोकपाल बिल मानने में समस्या क्या है? देश का हर नागरिक इस से सहमत है. फिर आप लोगों को किस बात का डर है ? वहां तो आप लोगों की वोटे भी नहीं कट रही? कोई भी कारण आप बता सकते हैं जिसकी वजह से आप इसे टरका रहे हैं? देश की जनता इतनी मूर्ख नहीं है , की अगर आप कारण बताएं और हम समझ न पायें. आप लोकपाल बिल न पास करने का एक उचित कारण बता दीजिये , हम अन्ना हजारे का साथ नहीं देंगे.. लेकिन हमे पता है... आप के पास कोई कारण नहीं है. माफ़ कीजियेगा इस से हमे यही सन्देश मिलता है, की आप भी भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं करना चाहते. हमे आपकी इमानदारी पर कोई शक नहीं है, लेकिन देश की जनता आप पर ऊँगली उठाने लगी है . इसकी वजह आपको तलाशनी होगी.. अन्ना हजारे की मांग जायज है और ये हम सबकी मांग है. जनता की मांग न मानना तानाशाही है. लोकतंत्र नहीं. .. जनता अगर नाजायज मांग करे तो बात समझ में आती है. उसे नहीं माना जाना चाहिए. लेकिन लोकपाल बिल में कुछ भी नाजायज नहीं है... ये जनता के हक में है..आप बस लोकपाल बिल न मानने की एक वजह भी बता दीजिये.?

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की असली स्वामी जनता है और उसके नाते मुझे आप और हर मंत्री -संत्री को हुकुम देने का अधिकार है.. फिर भी आपसे हाथ जोड़ कर प्रार्थना है , कि जनता कि आवाज़ को पहचानिए ... आप जैसे ईमानदार प्रधान मंत्री से हमे आशाएं हैं. आशा है आप हमारे जज्बातों की कद्र करेंगे ..

आपका शुभाकंशी
आनंद राठोर
A drop of ink, makes million think

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

चाय के बाद
काम के बाद , थोड़ा आराम
काम प्रगति पर
काम शुरू
सुबह चार बजे खेतो में काम को तैयार