बुधवार, 25 अगस्त 2010

वो सर झुका के आसमां पे चला तो क्या यारों।
मैं सर उठा के ज़मी पे तो चला हूँ यारों।

2 टिप्‍पणियां:

  1. वो सर झुका के आसमां पे चला तो क्या यारों।
    मैं सर उठा के ज़मी पे तो चला हूँ यारों।

    वाह....वाह......!!

    बहुत खूब .....!!

    आपका ही है न ....???

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  2. शुक्रिया ..जी . मेरा ही है. इस ब्लॉग पर आपको सिर्फ मेरी मौलिक रचनाएँ ही मिलेंगी.

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