बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

मुझे ये याद रहता है जो मुझको भूल जाना है।

काश भूलना आसान होता
जब भी कोशिश करता हूँ ,
मुझे ये याद रहता है जो मुझको भूल जाना है।

9 टिप्‍पणियां:

  1. Wah! bahut khooob ,aanand ji ,kya baat kahi hai.bahut achhi post.
    aabhar
    poonam

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  2. hmmm... jab bhi kisi ko bhulane kee koshish karo tab wo kuchh jyada hi yaad aata hai...

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  4. aap dono ka shukriya .. pooja ji aapne baat sahi kahi... lekin kamqakt jab khud ko bhulana ho to koi kaya kare...

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  5. अरे गुरू, इस मर्ज के तो हम भी मरीज हैं। लाईलाज है ये।

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  6. ...और मैं सोचता हूँ
    कि इसे मैं भूल गया
    वही याद आता है .....

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  7. काश कि भूल जाना कठिन होता। मै तो आज कल सब कुछ भूल जाती हूँ। शुभकामनायें।

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  8. आपकी इस बात पर एक चुटकुला याद आया. एक बार संता बार में बैठ कर खूब रो रहा था, बंता के पूछने पर उसने कहा कि यार मैं उस लड़की का नाम याद नहीं कर पा रहा जिसे भूलने के लिए मैंने शराब पिया है.

    सब हँसते होगे संता पर, मगर एक बार को सोचती हूँ वो आदमी कितना लकी रहा होगा, जो भूल तो पाया कुछ देर के लिए ही सही.

    एक बात जरूर कहना चाहूंगी, आपके ब्लॉग पर मैं दूसरी बार आ रही हूँ. पिछली बार यही कोई साल भर पहले की बात रही होगी. कहीं से घूमते हुए आई थी. उस वक्त भी आपके प्रोफाइल फोटो को बड़ा करके देखा था. इसलिए आपका फोटो मुझे अब तक याद रह गया. आप हँस रहे होगे मेरी इस बात पर, पर ब्लॉग पर ही मैं मन की बात आराम से कह लेती हूँ. अब इसे आप अन्यथा न लेकर प्रशंसा के तौर पे ले सकते है.;-)

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  9. nirmala ji aapko ye yaad rahta hai..ki aap sab kuch bhool jaati hain...ye bhi badi baat hai... shukriya

    vandana.. prashansa ko anyatha lena bhi nahi chahiye... enjoy karna chahiye.. life is short , death is sure.. enjoy .. prashansa, critics ... what ever..

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