शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

मेरी आँखों में नमी रही गयी

मेरी आँखों में नमी रही गयी ।
ज़िन्दगी में तेरी कमी रह गयी।
आसमान तो बहुत बर्षा था
जाने क्यूँ बंजर ज़मी रह गयी।
सेहरे के फूल बहुत महंगे थे
बेटी की डोली सजी रह गयी।

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द भावमय प्रस्‍तुति ।

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  2. 3/10

    एक बढ़िया कोशिश
    लिखते रहिये ... होंगे कामयाब एक दिन ..

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  3. बहुत सुंदर जिंदगी की हकीकत समेटे हुए भावपूर्ण पंक्तियाँ ...

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